"क्राइम एक राज".
"क्राइम एक राज".
यह कहानी एक कॉलेज छात्र
की है जिसका नाम
करण है। उसके पिता
एक इंस्पेक्टर हैं, लेकिन करण
को जासूस बनना है। इसी
वजह से वह अपने
पिता के काम में
हमेशा कुछ न कुछ
गड़बड़ कर देता है।
एक दिन पुलिस स्टेशन
में एक लड़की की
मिसिंग रिपोर्ट आती है। लड़की
कल रात से गायब
है, और उसके घरवालों
को लगता है कि
वह किसी के साथ
भाग गई है। लेकिन
उसका बॉयफ्रेंड भी रिपोर्ट दर्ज
करवाने आ जाता है।
तब लड़की के पिता गुस्से
में आकर उसे मारने
की धमकी देते हुए
कहते हैं, "कहां छुपाया है
उसे? बता नहीं तो
मैं तुझे जान से
मार दूंगा।" लड़का जवाब देता है,
"आज अचानक इतना प्यार क्यों
आ रहा है? सब
जानते हैं कि आप
उसके सौतेले मां-बाप हैं,
बस उसकी जायदाद हड़पने
के लिए उसके साथ
रह रहे हो। इसलिए
आपकी यह दलील मेरे
पास नहीं चलेगी।"
यह सब कुछ करण
और उसका दोस्त कुणाल
देख रहे होते हैं।
तभी करण लड़की की
फोटो उसकी मां के
हाथ में देखता है
और कहता है, "यह
वही लड़की है जिसे मैंने
कल रात मंदिर की
ओर जाते हुए देखा
था।"
लड़की
की मां कहती है,
"क्या कहा? मंदिर? यह
कभी नहीं हो सकता,
वह भगवान में विश्वास नहीं
करती क्योंकि उसके असली मां-बाप का एक
यात्रा के दौरान एक्सीडेंट
हो गया था। तब
से वह भगवान में
विश्वास नहीं करती।" करण
के पिता कहते हैं,
"ठीक है, आप लोग
रिपोर्ट लिखवा के जाइए, हम
उस लड़की को ढूंढते हैं।"
लड़की
के मां-बाप और
उसका बॉयफ्रेंड रिपोर्ट लिखवाकर चले जाते हैं।
करण के पिता उससे
पूछते हैं, "तुम यहां क्या
कर रहे हो, करण?"
करण कहता है, "मैं
तो बस आपका टिफिन
देने आया था।" पिता
कहते हैं, "ठीक है, रख
दो और जाओ, और
हां, कोई गड़बड़ मत
करना।" करण कहता है,
"हां पिताजी।"
(करण
और उसका दोस्त स्टेशन
से बाहर जाते हैं।
तभी करण को याद
आता है कि गाड़ी
की चाबी अंदर ही
रह गई है, तो
वह लेने जाता है।
उसके पिता किसी से
फोन पर बात कर
रहे होते हैं।)
करण
के पिता कहते हैं,
"हां, मैंने संभाल लिया है, आप
टेंशन मत लो। हां,
उसके बारे में उन्हें
कुछ नहीं पता, आप
बस अपना ख्याल रखो।"
तभी करण वहां आता
है और पिता पूछते
हैं, "हां, बोलो, क्या
हुआ?" करण कहता है,
"कुछ नहीं, बस चाबी रह
गई थी, वही लेने
आया था।" पिता कहते हैं,
"ठीक है, ले लो।"
(करण चाबी लेकर चला
जाता है।)
कुणाल
पूछता है, "बहुत देर कर
दी आने में, क्या
हुआ? इतना दुखी क्यों
हो?" करण कहता है,
"शायद मेरे पिताजी ने
उस लड़की का अपहरण किया
है।" कुणाल कहता है, "पर
वे ऐसा क्यों करेंगे?"
करण बताता है, "मैंने उन्हें फोन पर बात
करते सुना था।" (करण
सारी बातें कुणाल को बताता है।)
कुणाल कहता है, "टेंशन
मत लो, हम कुछ
न कुछ करेंगे।" करण
कहता है, "मैं उस लड़की
को ढूंढ कर रहूंगा।"
करण
घर चला जाता है
और वहां उस लड़की
की तसवीरें ढूंढने लगता है। उसे
शक होता है कि
कुछ गड़बड़ है, और उसका
शक यकीन में बदल
जाता है। फिर वह
कुणाल के साथ गांव
जाकर पूछताछ करता है। एक
बुजुर्ग व्यक्ति उससे कहते हैं,
"हां, बेटा, मैंने उसे कल मंदिर
की ओर जाते हुए
देखा था, पर वह
मंदिर में दर्शन करने
की बजाय रोने लगी।
मैंने उससे पूछा कि
क्या हुआ बेटा, पर
उसने कुछ नहीं बताया
और सीधे तालाब की
ओर जाने लगी।" करण
कहता है, "धन्यवाद, काका।" काका कहते हैं,
"मगर हुआ क्या है?"
करण कहता है, "कुछ
नहीं, बाद में बताऊंगा।"
करण
और कुणाल तालाब की ओर जाते
हैं। सर्दी के मौसम में
तालाब पूरी तरह जम
चुका होता है, और
वहां छोटे बच्चे अपनी
मां के साथ घूमने
आते हैं। तभी करण
को तालाब के पास नाव
में उस लड़की के
बॉयफ्रेंड की कुछ चीजें
मिलती हैं, जिससे उसे
लगता है कि रिमा
(लड़की का नाम) उसके
साथ यहां आई थी।
फिर करण अपने पिता
को वहां देखता है,
जो किसी आदमी से
बात कर रहे होते
हैं। करण को उनकी
बातें सुनाई नहीं देतीं, पर
उनकी बातें खत्म होने के
बाद करण अपने पिता
का पीछा करता है
और कुणाल उस आदमी का।
करण
के पिता एक बंद
पड़ी हुई इमारत के
पास जाते हैं और
वहां एक बूढ़े आदमी
से मिलते हैं। वे उसे
रिमा की कुछ तस्वीरें
देते हैं, जिसे देखकर
वह बूढ़ा आदमी रोने लगता
है। काफी देर बाद
करण के पिता वापस
घर के लिए निकलते
हैं और करण अब
भी उनका पीछा कर
रहा होता है। तभी
करण के पिता उसे
देख लेते हैं। करण
उन्हें कॉल करता है
और कहता है, "मुझे
आपके बारे में सब
कुछ पता चल चुका
है, आप अपना गुनाह
कबूल कर लीजिए, नहीं
तो मैं सब कुछ
आपके सीनियर ऑफिसर को बता दूंगा।"
ये सुनकर करण के पिता
उसे रोकने की कोशिश करते
हैं और कहते हैं,
"तुम गलत समझ रहे
हो, ऐसा कुछ नहीं
है।" इसी दौरान करण
के पिता की कार
एक पेड़ से टकरा
जाती है, और कार
का फ्रंट स्क्रीन उनके सीने में
लग जाता है। करण
जल्दी से उनके पास
जाता है। करण के
पिता उससे कहते हैं,
"बेटा, मैंने उस लड़की को
सुरक्षित रखने का वादा
उसके पिता से किया
था। उसके पिता और
मैं पुराने दोस्त थे। उसके पिता
और मां का एक
कार एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें
उसकी मां नहीं बच
पाई। इसलिए उसके पिता ने
उसकी सुरक्षा के लिए खुद
से दूर रखने का
फैसला किया था। तभी
से मैं उस लड़की
का ख्याल रख रहा था।"
यह सब सुनकर करण
को झटका लगता है,
और उसे सारी बातें
समझ में आ जाती
हैं।
वह तुरंत
एम्बुलेंस को कॉल करता है। उधर, कुणाल उस आदमी का पीछा करता है। उसे पता चलता है कि
वह आदमी कोई और नहीं बल्कि उनके पुलिस स्टेशन का सब-इंस्पेक्टर है, जो चोरी-छुपे उस
लड़की के बारे में जांच कर रहा था। यह सब कुणाल करण को बताता है। करण तभी तालाब के
पास मिली चीज़ें देखने लगता है, जिसमें उसे रीमा के बॉयफ्रेंड का लोकेट मिलता है। उसमें
उसे कुछ तस्वीरें मिलती हैं, और सारी बातों की गुत्थी सुलझ जाती है।
करण रीमा के
बॉयफ्रेंड के घर जाता है और वहां जाकर पता करता है कि रीमा का बॉयफ्रेंड अकेला रहता
है। वह वहां नहीं था। करण वॉचमैन से पूछता है, तो वह बताता है कि वह फार्महाउस में
है। करण और कुणाल फार्महाउस की ओर जाते हैं। वहां उन्हें एक पुराना बंद घर दिखता है,
लेकिन वहां की लाइट्स अब भी जल रही होती हैं। करण कुणाल से कहता है, "मैं घर में
जा रहा हूं, अगर कोई आए तो बता देना।"
करण घर के अंदर
जाता है। उसे एक बंद कमरे से किसी के फुसफुसाने की आवाज़ सुनाई देती है। वह जाकर देखता
है कि रीमा बेहोश पड़ी है। करण उसे उठाने की कोशिश करता है, लेकिन वह उसे उठा नहीं
पाता। तभी कुणाल की चिल्लाने की आवाज़ सुनाई देती है, और करण सतर्क हो जाता है। वह
पास की अलमारी में छुप जाता है और सब कुछ देखता रहता है। रीमा का बॉयफ्रेंड अंदर आता
है और रीमा की रस्सियां खुली देखकर चौकन्ना हो जाता है। वह करण को ढूंढने लगता है।
जैसे ही वह बिस्तर के नीचे देखने को झुकता है, करण पीछे से उसके सिर पर वास मारता है।
रीमा का बॉयफ्रेंड वहीं बेहोश हो जाता है।
करण रीमा के
बॉयफ्रेंड को रस्सियों से बांधकर रखता है और रीमा को वहां से ले जाने की कोशिश करता
है। रीमा अब भी बेहोशी की हालत में थी। कुणाल भी वहां आ जाता है। कुणाल के सिर से खून
बह रहा होता है। करण उससे पूछता है, "यह सब कैसे हुआ?" तो कुणाल बताता है,
"इसने मेरे सिर पर पीछे से कुछ मारा।" कुणाल और करण रीमा को अस्पताल ले जाते
हैं। डॉक्टर उन्हें रीमा की तबीयत के बारे में बताते हैं कि उसे कई दिनों से 'डाईमेथाइल
मर्करी' नाम का ज़हर दिया जा रहा था, जो धीरे-धीरे किसी भी इंसान को मार सकता है। यह
सब सुनकर करण को रीमा की बहुत चिंता होने लगती है।
उसी समय करण
के पिता को भी अस्पताल से डिस्चार्ज मिल जाता है। करण अपने पिता को सारी बातें बताता
है। उसके पिता सारी बातें समझ जाते हैं और उससे कहते हैं, “तुम रीमा का ध्यान रखना।” और उसकी सुरक्षा के लिए वहां दो कॉन्स्टेबल को तैनात कर देते
हैं।
करण को रीमा
की बहुत चिंता होने लगती है, इसलिए वह रातभर रीमा के पास ही रहता है। सुबह रीमा को
होश आता है, और वह अपने पास करण को देखकर चौंक जाती है। रीमा करण से कहती है, “तुम
यहां क्या कर रहे हो? मुझे लगा कि तुम मुझे भूल चुके होगे। जब से वो सब हुआ है, तुमने
मुझसे बात भी नहीं की।” करण कुछ भी नहीं कहता और वहां से चला
जाता है। यह सब कुणाल देख रहा था। कुणाल करण से पूछता है, "ये सब क्या है? वो
लड़की तुम्हें कैसे जानती थी, और तुम उसे बचाने के लिए अपनी जान खतरे में क्यों डाल
रहे हो? यहां तक कि तुमने अपने पिता के बारे में भी नहीं सोचा?" करण उसे सारी
बातें बताने लगता है।
"जब मैं
कॉलेज में आने से पहले समर कैंप गया था, वहां मेरी मुलाकात रीमा से हुई थी। उसके साथ
उसका बॉयफ्रेंड भी था। हम लोग वहां अच्छे दोस्त बन गए थे, लेकिन मुझे यह नहीं पता था
कि रीमा मुझे पसंद करने लगी थी। एक दिन उसने मुझे बताया कि वह मुझे पसंद करती है। मुझे
लगा कि वह मजाक कर रही है, इसलिए मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। उसने मुझसे पूछा कि
क्या तुम मुझे पसंद करते हो? तो मैंने 'नहीं' कहा। उसने धमकी दी कि अगर मैंने उसे
'हाँ' नहीं कहा, तो वह अपनी जान दे देगी। तभी वहां उसका बॉयफ्रेंड आ गया, और मैंने
उसे सारी बातें बता दीं। तब से मैंने रीमा और उसके बॉयफ्रेंड को नहीं देखा। उसी दिन
स्टेशन पर मैंने उसके बॉयफ्रेंड को देखा। तभी मुझे लगा कि शायद उस दिन अगर मैं उसे
'हाँ' कह देता, तो आज यह सब कुछ नहीं होता।” करण
रोने लगता है।
उधर, पुलिस
स्टेशन में रीमा के बॉयफ्रेंड से पूछताछ की जा रही थी, लेकिन वह कुछ भी नहीं बता रहा
था। पुलिस बहुत परेशान हो चुकी थी, क्योंकि रीमा के बॉयफ्रेंड के बारे में उनके पास
कोई व्यक्तिगत जानकारी नहीं थी। उसके माता-पिता कौन हैं, यह भी मालूम नहीं था।
उसी रात, करण
और उसके पिता खाना खाते समय करण से बात करते हैं। करण के पिता कहते हैं, "रीमा
के बॉयफ्रेंड का नाम रमेश है, मगर इसके अलावा हमारे पास उसके बारे में और कुछ भी जानकारी
नहीं है। क्या तुम रीमा से पूछकर कुछ पता कर सकते हो?" करण कहता है, “ठीक है,
मैं कोशिश करता हूं।”
अगले दिन करण
रीमा से मिलने जाता है और उससे रमेश के बारे में पूछता है। रीमा कहती है, "रमेश
तो मेरा बॉडीगार्ड है, जिसे मेरे पिताजी ने काम पर रखा था।" करण को अब सब कुछ
समझ में आ गया था। वह अपने पिता को लेकर रीमा के घर जाता है और कहता है, "अब हमें
आपके बारे में सब कुछ पता चल चुका है। ये दोनों ही रमेश के असली माता-पिता हैं।"
करण के पिता करण से पूछते हैं, "तुम ये कैसे कह सकते हो?" करण कहता है,
“मुझे रमेश का वही लोकेट तालाब के पास मिला था, जिसमें सिर्फ रमेश की ही तस्वीरें थीं।
लेकिन यही लोकेट मैंने रीमा के पास भी देखा। जब मैंने रीमा से पूछा कि ये तुम्हें किसने
दिया, तो उसने कहा कि ये मुझे मेरे पिताजी ने दिया है।” रमेश
रीमा से इसलिए जलता था कि सौतेले माता-पिता होकर भी वे रीमा को अपनी बेटी की तरह प्यार
करते थे। इसी वजह से उसने ये साजिश रची थी, ताकि वह उनकी जगह ले सके।
तभी करण के
पिता कहते हैं, "उस दिन पुलिस स्टेशन में उसने ऐसा क्यों कहा कि वह रीमा का बॉयफ्रेंड
है?" करण कहता है, "ताकि कोई ये न जान सके कि वह उनका बेटा है, इसलिए उसने
रीमा का बॉयफ्रेंड होने का नाटक किया। जबकि वह वास्तव में रीमा का बॉडीगार्ड था। वह
उसकी सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि उस पर नजर रखने के लिए था, ताकि मौका मिलते ही उसे
मार सके और उसकी सारी जायदाद खुद हासिल कर सके।"
यह सब सुनकर
रीमा के पिता कहते हैं, “हाँ, तुमने सब सही कहा, मगर तुम ये नहीं जानते कि मैंने ही
उसके माता-पिता को मारा था। हम दोनों बिजनेस पार्टनर थे, और जब उन्होंने मेरी कंपनी
में गलत जगह पैसा खर्च करने के लिए मुझे कंपनी से निकाल दिया, तो मैंने मौका देखकर
उन्हें मार दिया।” करण कहता है, “नहीं, रीमा के पिता अभी
भी ज़िंदा हैं, तो तुम्हारा खेल अब खत्म समझो।”
पुलिस रीमा
के माता-पिता को गिरफ्तार कर लेती है। करण के पिता को बहुत गर्व होता है कि उनका बेटा
एक दिन बहुत बड़ा डिटेक्टिव बनेगा।
अगले दिन रीमा
को अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। उसके पिता उसका इंतजार कर रहे होते हैं। वह उनसे
मिलती है और उन्हें गले लगाकर रोने लगती है। तभी कुणाल और करण वहां आते हैं। करण रीमा
से कहता है, "तुमने मुझसे कुछ पूछा था न? मेरा जवाब 'हाँ' है!"
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Writer : Khande Rameshwar
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